जब भी करना किसी से खुलकर

जब भी करना किसी से खुलकर मोहब्बत करना,
दबी -दबी सी करोगे तो यार मत करना ,
यह इमारत तो दिखावे की नीव , पे ना हो
सबसे पहले जाहिर हकीकत करना
बस वहां से मोहब्बत खत्म हो गई समझो
जहां से साथी शुरू कर दे शिकायत करना
तू जरा सुन ले एक किताब इल्तिजा मेरी
वह तुझे जब छुए तो पेश मेरा खत करना
देखो हारे हुए आशिक की जिंदगी क्या है
कि सुबह शाम किसी तरह गम गलत करना
वक्त आए कभी तो जेल लेना तनहाई
मगर जो करना तो अच्छे की ही सोबत करना

Pankaj Jain
Book “dil to dil hai”

याद आते हो सनम तुम रह-रहकर

याद आते हो सनम तुम रह-रहकर
आशु देते हैं गवाही बह बह कर
तंग आ चुके हैं तुमसे कह कर कर
थक गए हैं अब जुदाई सह सह कर

हाय जुदाई कैसी आई ,भूल गए सब शिकवा हम
बाद तेरे जाने के जाना, रह न सकेंगे तन्हा  हम

के हमने महसूस किया है आज अधूरापन खुद में
कि मेरा एक हिस्सा तुम हो, कि तेरा एक हिस्सा हम

आज बिन तेरे यह तय हे, जिंदगी नहीं गुजरेगी
कौन बनाएगा फिर हम को किस से करेंगे झगड़ा हम

आज समझ पाए हैं हमको तन्हाई ने समझाया
तेरी मानेंगे कर लेंगे अपनी जीत से तोबा हम

जी रहे हैं जैसे तैसे प्यार की हसरत लिए
शोहरत शानो-शौकत जैसी चीजों पे जिंदा हम