KISSA E SAFAR

किस्सा ए सफ़र 

ना पूछ क्या तय किया ज़िन्दगी का सफर
हर मोड़ पे ही मंजिले बदलती गई

दूर तक राह आती नहीं थी नज़र
हर कदम उलझने साथ चलती गयी

बेहया ये तमन्नाएँ हैं इस कदर
बारी बारी से सारी मचलती गयी

थक गए पीछा करते हुए हर डगर
ज़िन्दगी आगे आगे निकलती गयी

सबका हमसा तो है किस्सा ए सफ़र
सोच सोच करके तबियत बहलती गयी

साथ आया नहीं एक अदद हमसफ़र
हर मक़ाम पे ये कमी भी खलती गयी ॥

 FROM 
“DIL TO DIL HAI” 
BY PANKAJ JAIN@ ALL RIGHTS RESERVED
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