DIL TO DIL HAI

दिल तो दिल है 

अपनी हालत पर हंसी भी आती है रोना भी
दर्द ए दिल कातिल भी है, सलोना भी

मैं सिमट पाऊं जिसमे और उनसे बच  जाऊं
ना रहा मेरे दिल में ऐसा एक कोना भी

रात लम्बी हुई है एक जिंदगी की तरह
उसपे मुश्किल हुआ है दो घडी का सोना भी

उनसे मिलकर मेरी अक्ल को हुआ क्या है
 हंस के मंज़ूर है खुद का तबाह होना भी

कोई शिकवा नहीं अगर वो हमसे खेल लिए
कुछ तो समझा हमें,समझा चलो खिलौना भी

 FROM 
“DIL TO DIL HAI” 
BY PANKAJ JAIN@ ALL RIGHTS RESERVED
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