रिश्ते सारे टूट रहे है

रिश्ते सारे टूट रहे है 

रिश्ते सारे टूट रहे है
और एहसास भी रूठ रहे है

आसपास की किसे खबर है
बस अपने आंगन पे नज़र है
भूल के खून के रिश्तों को तक
सब खुद ही में जुट रहे है ॥

दौलत की है मारा मारी
इंसानियत रोये बेचारी ,
अपनों को ही लुटे दुनिया
सारे भरोसे उठ रहे है ॥

सारा बनावट का है ज़माना
रिश्ते भी पड़ते है दिखाना,
औरों की क्या बात करें हम
अपने ही दिल से झूठ कहे है ॥

दिल का दिल से रिश्ता नहीं है
जिसकी ज़रूरत, अपना वही है ,
बूढ़ा बाप है चेहरा तकता
माँ के आंसू फूट रहे है ॥
रिश्ते सारे  टूट रहे है ………

FROM 
“DIL TO DIL HAI” 
BY PANKAJ JAIN@ ALL RIGHTS RESERVED
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