POETRY OF ROMANCE

जुदाई 

हाय जुदाई कैसी आई भूल गए सब शिकवा हम 

बाद तेरे जाने के जाना रह न सकेंगे तनहा हम 

के हमने महसूस किया है आज अधूरापन खुद में
कि मेरा एक हिस्सा तुम हो की तेरा एक हिस्सा हम 

आजा बिन तेरे ये तय है जिंदगी नहीं गुजरेगी 
कौन मनायेगा फिर हमको,किस्से करेंगे झगडा हम 

आज समझ पाए है हमको तन्हाई ने समझाया 
तेरी मानेंगे केर लेंगे अपनी जिद से तौबा  हम 

जी रहे है जैसे तैसे प्यार की हसरत लिए 
शोहरत शानो शौकत जैसी चीजों पे है जिंदा हम 
पंकज जैन “सुकून”
“दिल तो दिल है “पुस्तक से साभार 
@सर्वाधिकार सुरक्षित 
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