तुम्हे क्या लगता है ?

तुम्हे क्या लगता है ?
तुम जो भी करती हो अच्छ लागता है 
प्यार हें या कुछ और तुम्हे क्या लगता है !
कुछ भी नही हे मुझसे कहा  हालातो ने 
क्यों फिर भी कुछ तो है  ऐसा लगता है !      
यकीं नहीं होता है तो मत होने दो 
मेरा गम औरो को किस्सा लगता है !
दिल से जीने की कोशिश में जो भी है 
वो दुनिया से रूठा- रूठा लगता है !
उस खोए मासूम की याद आ जाती है 
जब छोटा सा .बच्चा दाना लगता है ! 
 
पंकज जैन “सुकून”
“दिल तो दिल है “पुस्तक से साभार 
@सर्वाधिकार सुरक्षित 
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