किस्सा ए सफ़र

KISSA E SAFAR


एक तरफ मेरी बंजारा मिज़ाजी है ,दूसरी तरफ 

दुनिया की सवालिया निगाहें ।
सवाल उठता है कि यही अंदाजा -ए -सफर रहा तो मै 
कितना आगे  जा पाऊँगा ?

मेरा जवाब यही होता है कि भेड़े सारी आगे -आगे 
होती है और चरवाहा सबसे पीछे ।
मुझे तो पीछे रहना ही होगा ।
आवारा पंछी की तरह जब जो चाहा वो किया ,
कोई मजबूरी नही, हम जी रहे है शौकिया ।
पंकज जैन “सुकून”
“दिल तो दिल है “पुस्तक से साभार 
@सर्वाधिकार सुरक्षित 
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