उम्र के अंदाज़ 

 उम्र के अंदाज़ 


सब कुछ बदलना चाहते है ,उम्र वो भी होती है 
फिर सबमे ढलना चाहते है ,उम्र वो भी होती है !

के कभी दिल चाहता है रहना महफ़िल में 
तनहा टहलना चाहते है,उम्र वो भी होती है !

लेते है बेझिझक कभी औरों से रोशनी 
खुद भी जलना चाहते है , उम्र  वो भी होती है !

हो  जाते है हर काम में इक उम्र में शामिल 
सबसे निकलना चाहते है उम्र वो भी होती है !

है कौन  यहाँ वो जो संभला है शुरु से 
खुद ही फिसलना चाहते है उम्र वो भी होती है !

पंकज जैन “सुकून”
“दिल तो दिल है “पुस्तक से साभार 
@सर्वाधिकार सुरक्षित 
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