REALLY SMART TIME MANAGEMENT

टाइम की बहुत कमी है क्या ?

दुनिया में लोगों को सिर्फ दो ही तो प्रॉब्लम है –

पहली ये कि हर काम के लिए टाइम कम पड़ जाता है यानि कि  वक़्त बहकर गुज़र जाता है .

दूसरी ये कि साला वक़्त गुज़रता ही नहीं,
आखिर के 20साल गुज़र जाये ,इसी चक्कर में तो आदमी पहले के 40साल भागता रहता है .

टाइम मैनेजमेंट का मतलब सिर्फ भागते वक़्त को मक्सिमम यूज़ करना ही नहीं ,बल्कि 
ठहरे वक़्त को आसानी से गुजारने की कला भी है .

टाइम मैनेजमेंट के लोग कई तरीके अपनाते रहे है –


1.कामों की लिस्ट बना बना कर दिन भर  देखते रहना,
इसमें 20कामों की लम्बी लिस्ट का टेंशन हाथ का काम बिगाड़े ,तो गड़बड़ हो रही है ,और ये भी न हो कि 12 काम होने की ख़ुशी न मनाकर बचे 8 कामों का रोना रोयें .
हफ्ते में 2 बार लिस्ट बना भी लो तो 4 सबसे जरुरी काम चुन लो और उनपे फोकस करके निपटाओ और मन से  फ्री हो जाओ .बाकि छोटे मोटे काम भी अपने आप  होते रहते है।

2.लोग पक्का शेडयूल या टाइम टेबल बना कर आँख मूंद कर भाग भाग कर काम करते है .कई काम पुरे भी कर लेते है,पर उनसे ऐसे लोग आगे निकल जाते है जो बड़े आराम से चुनिदा काम करते है।
ऐसा क्यों?
क्योंकि असली जरुरी काम याद आने के लिए थोड़ी फुर्सत जरुरी है।

लाइफ में एक लय हो तो काम में और जीने में मजा आ जाता है .
लय के लिए घडी के घोड़े से उतर कर लाइफ को जीना सीखो।

टाइम की कमी 2 दिनों में दूर हो जाएगी –
बस आपको करना होगा टाइम आडिट 

अपने 2 दिनों के रुटिन को हर आधे घंटे में एक पाकेट  डायरी में नोट कर लें .फिर देखिये आप ये जान कर शरमा जायेंगे कि आपने असली काम 4 घंटे किया .
बाकि टाइम काम के बारे में सोचते हुए गुजर गया .
बीच में ऐसे 10-10मिनट के कई टुकड़े आते है जिनका इस्तेमाल हो सकता है।
लेकिन या तो काम उस टाइम याद नहीं आता ,
या आपको लगता है कि इतने से वक़्त में क्या हो जायेगा .

 घडी के डर से लोग काम शुरू करने के पहले ही रुक जाते है .सोचते है कि  टाइम कम पड़ गया  तो ?
वक़्त ठहर जाए तो भी घडी को भूल जाओ और जो आस पास थोडा भी खूबसूरत काम हो ,उसमे लग जाओ .

हकीकत ये है कि वक़्त को रोका नहीं जा सकता ,
गुजरता तो वो अपने आप है ,
झूठ  है कि उसे गुजारना पड़ता है .

जिंदगी हर पल जलवे में गुजरे ,
इस जिद , इस चिंता में
हाथ आये जलवे भी हम जी नहीं पाते .

एक प्यारे शायर की याद आ गयी –
उम्र जलवों में बसर हो , ये जरुरी तो नहीं 
सबकी आहों में असर हो ,ये जरुरी तो नहीं 
नींद तो दर्द के बिस्तर में भी आ जाती है’
उनके आगोश में सर हो ये जरुरी तो नहीं।

पंकज जैन
मनीगुरु
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