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फ्यूचर एंड आप्शन्स – future & option basics for beginners in Hindi

फ्यूचर  एंड आप्शन्स 
फ्यूचर एंड आप्शन्स कभी शेअर ट्रेडिंग की नई प्रणाली है ।चूंकि इसमे बड़े पैमाने पर काम होता है अतः बड़े नुकसान या फायदे की सम्भावना बनती है ।हर टर्मिनल पर एक स्क्रीन एन  एस इ की एवं  एक बी .एस .ई .एवं एफ & ओ के लीए सयुक्त स्क्रीन होती है ।फ्यूचर में फ़िलहाल 300+स्क्रिप्स है ,जिनमे ट्रेडिंग की जा सकती है ।केश मार्केट में आप अपनी क्षमतानुसार 50100 या 500 शेयर की ट्रेडिंग कर सकते है ।लेकिन एफ & ओ में ट्रेडिंग लाट एक्सचेंज द्वारा निश्चित होता है ।इसमे शेयर प्राइज के अनुसार 500.1000  या 10000 शेयर  तक लाट  साइज होता है ।
लाट वेल्यु का 15 से 20 %  मार्जिन मनी निर्धारित होता है ।मार्जिन हर दिन बदल सकता है ।फ्यूचर में डे ट्रेडिंग या स्क्वेअर अप ब्रोक्रेज (3 से 6 पैसा) ही लगती है।फ्यूचर में इन्वेस्टर  महीने के आखरी गुरुवार तक इंतजार कर सकता है।लास्ट थर्सडे सेटलमेंट या कटान  का दिन होता है।उस दिन सोदा समाप्त हो जाता है ।यदि आप फ्यूचर आगे केरी करना चाहे तो लगभग 1%अतिरिक्त देकर आगे बने रह सकते है ।लॉस या प्राफिट के चेक डे टू डे लिए जाते है।
तब तक साल भर केश मार्किट का अच्छा अनुभव न हो जाए ,इन्वेस्टर को एफ & ओ  से परहेज रखना चाहिए।एफ & ओ में 4-6 महीनों से  अच्छा कमाने वाले भी एक ही मंदी में दोहरा नुकसान उठा सकते है।
आप्शन्स में काल या पुट लिए जाते है।यदि किसी शेयर में आपको तेजी की सम्भावना लगती है तो आप काल खरीदते है।150/-मूल्य का शेयर है और काल प्रीमियम 10/-है तो आपको प्राफिट 150+10=160/- के बाद शुरू होगा।आपकी रिस्क मात्र 10 गुणा  लाट साइज तक सिमित है।
पुट में मंदी की सम्भावना खरीदी जाती है। 150-10=140/- से निचे जाने पर आपका फायदा शुरू होगा ,जिसकी कोई सीमा नही है।यदि प्राइज मूवमेंट हमारी उम्मीद के विपरीत होता है। तो काल या पुट गल जाते है और प्रीमियम राशि खो देते है।
महीने के सुरुआत में काल  या पुट का प्रीमियम एवं फ्यूचर एंड केश प्राइज का अंतर सर्वाधिक होता है। जैसे -जैसे सेटलमेंट का दिन  नजदीक  आता है ,प्रीमियम एवं डिफ़रेंस दोनों ही घटते जाते है।सेटलमेंट के दिन केश एवं फ्यूचर प्राइज समान हो जाती है।एफ & ओ का हेजिंग में काफी उपयोग है।हेजिंग अर्थात मूलधन को सुरक्षित रखने की व्यवस्था। मानाकि  किसी इन्वेस्टर का 50 लाख का प्रोर्टफोलियो खड़ा है।मार्किट गिरने पर बड़ा नुकसान संभव है। ऐसे में वह निफ्टी सूचकांक के उतने पुट खरीद लेगा,जितने का  प्रोर्टफोलियो है।इधर प्रोर्टफोलियो में नुकसान होगा,उधर निफ्टी गिरने से पुट में उतना ही पैसा मिलेगा।एक हद तक नुकसान की भरपाई हो सकेगी।हेजिंग में भी पैसा लगता है अत: इन्वेस्टर अपनी क्षमता एवं योग्यता के आधार पर आंशिक या सम्पूर्ण  हेजिंग  करते है।
एफ & ओ में हम शेयर के रेट के लिए लम्बा इंतजार कर  सकते है। तेजी में सब कुछ ठीक चलता है। मंदी में यही इंतजार मार डालता है।300/- का शेयर  इंतजार –  इंतजार में 200/ – से नोचे भी चला जाता है।ओर 1000 लाट साईज के फ्यूचर में 1 लाख से ज्यादा लॉस हो जाता है।  
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